प्राचार्य का सन्देश

प्राचार्य महोदय की कलम से

 

Principal

प्रिय दोस्तो,

जैसा की हम जानते हैं, “ज्ञान मनुष्य की वह जमा पूंजी है जिसको कभी भी किसी के द्वारा छीना नहीं जा सकता है”, पहले जिस तरह जंगलों और गुरुकुल में लोग ज्ञान को प्राप्त करने के लिए जाते थे उसी तरह आज के समय में विद्या ग्रहण करने के मुख्य केंद्र विद्यालय हैं जंहा पर छात्र विद्या को ग्रहण करता है। आज के ब्यावहारिक जीवन में ऐसे भी विद्यालय हैं जिसमे शिक्षा  मात्र ब्यापार का साधन बन के रह गयी है । समय समय पर सरकार विद्यालयों के सुधार हेतु योजनाएँ बनाती रहती है, जो छात्रों के उज्जवलभविष्य एवं उनके सर्वांगीण विकास के लिए होती हैं।  सरकार द्वारा निर्मित विद्यालय विद्या अध्ययन का प्रमुख साधन है। केन्द्रीय विद्यालय संगठन के अन्तरगत लगभग १००० से ज्यादा विद्यालयों का निर्माण भारत सरकार द्वारा किया जा चुका है जो भारत निर्माण मे प्रमुख रूप से भागीदारी निभा रहा है। ज्ञान जो कि ब्यक्ति को सर्वोपरि बनाता है जिसके कारण मनुष्य सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, और ज्ञान के  बिना मनुष्य एक जानवर की तरह ही रह जाता है। चूंकि ज्ञान एक गुरु के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है, हमारे भारत मे सदियों महारिषियों, मुनियों के द्वारा लोग ज्ञान प्राप्त करते थे, आज के समय में इसका रूप बदल चुका है, लोग समय के साथ विद्या का प्रमुख केंद्र विद्यालयों को  मान चुके हैं तथा लोगों का रुझान अतिसुविधा वाले विद्यालयों की तरफ ज्यादा है, जिनके मद्देनजर सरकार के द्वारा निर्मित केन्द्रीय विद्यालय संगठन सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों मे से एक है , इस विद्यालय में छात्रों की सर्वांगीण विकास हेतु संगठन दृढ़संकल्प है और समय समय पर इसका बदलाव भी किया जा रहा है, जिसमे सीसीई पैटर्न के अंतर्गत छात्रों का सतत एवं सम्पूर्ण मूल्यांकन (Continuous Comprehensive Evaluation) केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दिशा निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।
प्राचार्य
केन्द्रीय विद्यालय
उत्तर लखीमपुर